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CG-तहसील कार्यालयों में कामकाज बंद! छत्तीसगढ़ के 500 से अधिक तहसीलदार बैठे हड़ताल पर, आय-जाति से लेकर नामांतरण तक के काम प्रभावित

Tehsildar Strike: नायब तहसीलदार से अभद्रता व मारपीट मामले में तहसीलदारों का प्रदेशव्यापी हड़ताल जारी है। जिसके चलते 7 जून तक कामकाज प्रभावित रहने की संभावना है.



रायपुर। छत्तीसगढ़ में तहसीलदार और नायब तहसीलदारों की प्रदेशव्यापी हड़ताल का असर अब आम जनता पर साफ दिखाई देने लगा है। राजस्व विभाग के अधिकारियों के सामूहिक अवकाश और कार्य बहिष्कार के चलते प्रदेशभर के तहसील कार्यालयों में कामकाज लगभग ठप हो गया है। आय, जाति, मूल निवास प्रमाण पत्र, नामांतरण, सीमांकन, बटांकन और राजस्व न्यायालयों से जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्य प्रभावित हो रहे हैं। हड़ताल के कारण हजारों आवेदनों का निराकरण रुक गया है, वहीं तहसील न्यायालयों में लंबित मामलों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है।

मंगलवार को राजधानी रायपुर सहित प्रदेश के अधिकांश तहसील कार्यालयों में सन्नाटा पसरा रहा। कई लोग अपने प्रकरणों की सुनवाई और जरूरी दस्तावेजों के लिए कार्यालय पहुंचे, लेकिन हड़ताल की जानकारी मिलने पर उन्हें बैरंग लौटना पड़ा। अधिकारियों के कार्य बहिष्कार के कारण आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

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नायब तहसीलदार से मारपीट के विरोध में आंदोलन

हड़ताल की मुख्य वजह हाल ही में सरगुजा जिले के सीतापुर में हुई वह घटना है, जिसमें एक नायब तहसीलदार के साथ कथित अभद्रता और मारपीट का मामला सामने आया था। इस घटना के बाद प्रदेशभर के तहसीलदार और नायब तहसीलदार आक्रोशित हैं और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

राजस्व अधिकारियों का कहना है कि घटना के बाद सरकार और प्रशासन से कई दौर की चर्चा हुई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने के कारण उन्हें हड़ताल का रास्ता अपनाना पड़ा। अधिकारियों का आरोप है कि यदि सरकारी सेवाओं में कार्यरत अधिकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की जाएगी, तो प्रशासनिक व्यवस्था प्रभावित होना स्वाभाविक है।

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एक सप्ताह तक प्रभावित रह सकता है कामकाज

हड़ताल के कारण तहसील न्यायालयों में चल रहे प्रकरणों की सुनवाई भी प्रभावित हो गई है। जानकारी के अनुसार जिन मामलों की सुनवाई 2 जून को निर्धारित थी, उन्हें अब 8 जून तक के लिए स्थगित कर दिया गया है। वहीं 3, 4 और 5 जून को सूचीबद्ध मामलों की सुनवाई भी अगले सप्ताह तक टाल दी गई है।

इसके चलते नामांतरण, बंटवारा, भूमि विवाद, सीमांकन और अन्य राजस्व मामलों में न्याय की प्रतीक्षा कर रहे लोगों को और अधिक इंतजार करना पड़ सकता है।

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आय-जाति, मूल निवास और नामांतरण के कार्य अटके

हड़ताल का सबसे ज्यादा असर उन लोगों पर पड़ा है जिन्हें शिक्षा, नौकरी, छात्रवृत्ति या अन्य सरकारी योजनाओं के लिए आय, जाति और मूल निवास प्रमाण पत्र की आवश्यकता है। तहसील कार्यालयों में इन प्रमाण पत्रों के लिए लंबित आवेदनों का निराकरण नहीं हो पा रहा है।

इसके अलावा जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्रों में त्रुटि सुधार, खसरा नंबर संशोधन, सीमांकन, नामांतरण, बटांकन और अन्य राजस्व संबंधी कार्य भी पूरी तरह प्रभावित हैं। ग्रामीण क्षेत्रों से आए लोगों को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

जानकारी के अभाव में लौटे लोग

कई नागरिकों को हड़ताल की पूर्व जानकारी नहीं थी। ऐसे में वे अपने जरूरी कार्यों के लिए तहसील कार्यालय पहुंचे, लेकिन वहां अधिकारियों की अनुपस्थिति के कारण उन्हें निराश होकर वापस लौटना पड़ा। कई लोगों ने प्रशासन से हड़ताल संबंधी सूचना पहले से सार्वजनिक करने की मांग भी की है।

कांग्रेस ने दिया आंदोलन को समर्थन

राजस्व अधिकारियों की हड़ताल को कांग्रेस ने समर्थन दिया है। कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि सीतापुर की घटना बेहद गंभीर है और इसमें भाजपा विधायक रामकुमार टोप्पो के खिलाफ तत्काल कार्रवाई होनी चाहिए।

कांग्रेस का आरोप है कि सत्ता के प्रभाव में दोषी जनप्रतिनिधि को बचाने की कोशिश की जा रही है। पार्टी का कहना है कि यदि किसी विधायक को किसी अधिकारी की कार्यप्रणाली पर आपत्ति थी तो वे शासन और प्रशासन के उच्च स्तर पर शिकायत कर सकते थे, लेकिन किसी अधिकारी के साथ कथित मारपीट करना कानून और लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ है।

सरकार पर बढ़ रहा दबाव

घटना को लगभग एक सप्ताह बीत चुका है, लेकिन अब तक किसी बड़ी कार्रवाई की घोषणा नहीं हुई है। ऐसे में राजस्व अधिकारियों का आंदोलन लगातार लंबा खिंचता दिखाई दे रहा है। यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो प्रदेशभर में राजस्व व्यवस्था और अधिक प्रभावित हो सकती है।

राजस्व विभाग से जुड़े जानकारों का मानना है कि हड़ताल लंबी चली तो न केवल न्यायालयीन मामलों का बोझ बढ़ेगा, बल्कि आम जनता को भी आवश्यक दस्तावेजों और सेवाओं के लिए लंबे समय तक इंतजार करना पड़ सकता है। फिलहाल सभी की निगाहें सरकार और आंदोलनरत अधिकारियों के बीच संभावित बातचीत और उसके नतीजों पर टिकी हुई हैं।

cgnews24 Team

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